
आत्मविचार का अर्थ है अपने विचारों, कर्मों और भावनाओं पर गहराई से चिंतन करना।
यह व्यक्ति को स्वयं को समझने और अपने जीवन को सही दिशा देने में सहायता करता है।
भारतीय दर्शन में आत्मविचार को आत्मज्ञान की पहली सीढ़ी माना गया है।
उपनिषदों और गीता में बताया गया है कि जब व्यक्ति स्वयं को जान लेता है,
तभी वह सत्य और शांति को प्राप्त कर सकता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आत्मविचार हमें रुककर सोचने का अवसर देता है।
यह हमें यह समझने में मदद करता है कि हम क्या हैं, क्या बनना चाहते हैं
और हमारे कर्म किस दिशा में जा रहे हैं।
आत्मविचार से:
- मानसिक शांति मिलती है
- सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है
- आत्मविश्वास मजबूत होता है
अंत में, आत्मविचार कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं,
बल्कि जीवनभर चलने वाली साधना है।
