सुख-दुःख से परे — साक्षी का मार्ग
जब जीवन में सुख आता है,तो वह अपने साथदुःख की संभावना भी लाता है। लेकिन मनुष्यसुख को स्थायी मान लेता है,और यहीं सेउसका भ्रम आरंभ होता है। अद्वैत कहता है—सुख और दुःखदोनों ही मन के भाव हैं,स्वरूप नहीं। जो आता है,वह जाता है।जो बदलता है,वह तुम नहीं हो। मनुष्य तब दुखी होता है,जब वह सुख […]
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