इंसान खुद ही अपना विकास रोक देता है
इंसान को चेतना मिली है,पर उसने उसे बाहर खोजने की आदत बना ली।वह बदलना चाहता है दुनिया को,पर खुद को देखने से डरता है।यही डरउसके विकास की पहली दीवार है।तकनीक बढ़ी,पर समझ नहीं।बुद्धि तेज़ हुई,पर विवेक सो गया।इंसान जानता है क्या गलत है,फिर भी वही करता है—क्योंकि सुविधा सच्चाई से आसान लगती है।अहंकार कहता है […]
इंसान खुद ही अपना विकास रोक देता है Read More »
